Hindi moral story अपनी फूटी किस्मत पर रोना बंद करो

By | October 24, 2018

Hindi moral story अपनी फूटी किस्मत पर रोना बंद करो

hindi moral story of a farmer

दूर किसी गाँव में एक किसान रहता था. बारिश का समय था और सड़क पर बने गड्ढों में पानी भरा हुआ था. सड़क कच्ची थी और बारिश की वजह से फिसलन हो रही थी. किसान अपनी बैलगाड़ी लेकर शहर की तरफ़ चला जा रहा था. दिमाग में उसके ख्याल आ रहे थे की शहर जाकर कुछ पैसा कमाऊंगा गाँव में तो चारो तरफ़ पानी भरा है कोई कमाई नहीं हो रही. बड़ी सावधानी से वो सड़क पर चला जा रहा था की अचानक उसकी बैलगाड़ी का पहिया फिसला और गड्ढे में जा फसा.

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बैल ने बहुत कोशिश की लेकिन वो बैलगाड़ी को गड्ढे से बाहर न निकाल सका. अब किसान नीचे उतरा उसने अपने चारों तरफ़ देखा, मौसम खराब हो रहा था और उसे अपने चारों तरफ़ कोई दिखाई नहीं दे रहा था. लगा अपनी किस्मत को दोष देने, बोला मेरी तो किस्मत ही फूटी है, भगवान् में मेरा ही दुश्मन बना बैठा है, मैं कुछ भी करने जाता हूँ तो रास्ते में मुसीबतें तैयार बैठी रहती हैं.

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अभी वो ख़ुद को और भगवान् को कोस ही रहा था की एक महात्मा उधर से गुजरे, उन्होंने किसान से पूछा क्यूँ ख़ुद को कोस रहे हो. किसान बोला मेरे तो नसीब ही खराब है सोचा था शहर जा कर चार पैसे कमा लूँगा लेकिन भगवान् को वो भी मंजूर नहीं. मेरी बैलगाड़ी इस कीचड में फसा दी.

महात्मा ने बैलगाड़ी की तरफ़ देखा उसने देखा की बैल अपना पूरा जोर लगा रहा है और अगर कोई थोडा सा धक्का और लगा दे तो बैलगाड़ी बाहर निकल जाएगी. उसने किसान से कहा किसी और को छोड़ो तुम बताओ क्या तुमने प्रयास किया.  

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किसान बोला इतनी बड़ी बैलगाड़ी को मैं अकेले कैसे निकाल सकता हूँ तो महात्मा बोले तुम एक बार धक्का लगा कर तो देखो. किसान ने बैलगाड़ी को धक्का लगाना शुरू किया और उधर बैल ने भी पुरे जोर से बैलगाड़ी को खींचना शुरू किया. देखते ही देखते बैलगाड़ी बाहर निकल गयी. किसान बहुत ख़ुश हुआ और सोचने लगा की मैं इतनी देर से ऐसे ही परेशान हो रहा था जबकि ये काम तो मैं ख़ुद कर सकता था.

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दोस्तों अक्सर हमारे साथ लाइफ में यहीं होता है जब कभी हमारे ऊपर थोड़ी से मुसीबत आती है या हम किसी काम में असफ़ल होते हैं तो हम अपने नसीब को, अपने भगवान् को, अपने दोस्तों को रिश्तेदारों को और न जाने किस को किसको दोष देने लगते हैं जबकि सच्चाई ये है की हमारे अपने प्रयासों में कमी थी इस लिए हम असफ़ल हो गये.

एक बहुत पुराणी कहावत है की भगवान् भी उसी की मदत करते हैं जो अपनी ख़ुद की मदत करना जानता हो. सारी ताकत आपके अन्दर मौजूद है फिर आप नसीब के भरोसे या दूसरों के भरोसे क्यों अपने आप को छोड़ते हैं. उठिए आगे बढिए और प्रयास शुरू कीजिये सफ़लता अपने आप आपके नसीब में आ जाएगी.

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