Very Emotional Inspirational Hindi Story – Maa

By | December 22, 2017

Very Emotional Inspirational Hindi Story – Maa

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माली की रखवाली से तो मुरझाये फूल भी खिल जाते हैं

विशाखा एक छोटे से शहर के प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की Teacher थीं।

उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा “I LOVE YOU ALL” बोला करतीं थी। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती। वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं।

Class में एक ऐसा बच्चा था जो विशाखा को एक आंख नहीं भाता था। उसका नाम Shekhar था। Shekhar मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आ जाया करता था। उसके बाल खराब होते, जूतों के फीते खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान और पढ़ाने के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता।

Very Emotional Inspirational Hindi Story

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विशाखा के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखने तो लग जाता- मगर उसकी खाली-खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता, कि shekhar शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हैं। धीरे-धीरे विशाखा को Shekhar से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही Shekhar विशाखा की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण Shekhar के नाम पर किये जाते। बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते और विशाखा उसको अपमानित करके संतोष प्राप्त करतीं। Shekhar ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।

विशाखा को वह एक बेजान पत्थर की तरह लगता, जिसके अंदर Feelings नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्येक डांट, व्यंग्य और सजा के जवाब में वह बस अपनी भावनाओं से खाली नज़रों से उन्हें देखा करता और सिर झुका लेता। विशाखा को अब इससे गंभीर चिढ़ हो चुकी थी। पहला सेमेस्टर समाप्त हो गया और रिपोर्ट बनाने का चरण आया तो विशाखा ने shekhar की प्रगति रिपोर्ट में यह सब बुरी बातें लिख मारी।
प्रगति रिपोर्ट माता-पिता को दिखाने से पहले Head Mistress के पास जाया करती थी। उन्होंने जब Shekhar की रिपोर्ट देखी तो विशाखा को बुला लिया। “विशाखा प्रगति रिपोर्ट में कुछ तो प्रगति भी लिखनी चाहिए। आपने तो जो कुछ लिखा है इससे Shekhar के पिता इससे बिल्कुल निराश हो जाएंगे।” “मैं माफी माँगती हूँ, लेकिन Shekhar एक बिल्कुल ही अशिष्ट और निकम्मा बच्चा है। मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी प्रगति के बारे में कुछ लिख सकती हूँ। “विशाखा घृणित लहजे में बोलकर वहां से उठ आईं।

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हेड मिसटरेस ने एक अजीब हरकत की। उन्होंने चपरासी के हाथ विशाखा की डेस्क पर Shekhar की पिछले वर्षों की प्रगति रिपोर्ट रखवा दी। अगले दिन विशाखा ने कक्षा में प्रवेश किया तो रिपोर्ट पर नजर पड़ी। पलट कर देखा तो पता लगा कि यह Shekhar की रिपोर्ट हैं। “पिछली कक्षाओं में भी उसने निश्चय ही यही गुल खिलाए होंगे।” उन्होंने सोचा और कक्षा 3 की रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में टिप्पणी पढ़कर उनकी आश्चर्य की कोई सीमा न रही जब उन्होंने देखा कि रिपोर्ट उसकी तारीफों से भरी पड़ी है।

“Shekhar जैसा बुद्धिमान बच्चा मैंने आज तक नहीं देखा।” “बेहद संवेदनशील बच्चा है और अपने मित्रों और शिक्षक से बेहद लगाव रखता है।”

अंतिम सेमेस्टर में भी Shekhar ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। “विशाखा ने अनिश्चित स्थिति में कक्षा 4 की रिपोर्ट खोली।” Shekhar ने अपनी मां की बीमारी का बेहद प्रभाव लिया। उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है।” Shekhar की माँ को अंतिम चरण का कैंसर हुआ है। घर पर उसका और कोई ध्यान रखने वाला नहीं है। जिसका गहरा प्रभाव उसकी पढ़ाई पर पड़ा है।”

Shekhar की माँ मर चुकी है और इसके साथ ही Shekhar के जीवन की रौनक भी। उसे बचाना होगा…इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। “विशाखा के दिमाग पर भयानक बोझ तारी हो गया। कांपते हाथों से उन्होंने प्रगति रिपोर्ट बंद की। आंसू उनकी आँखों से एक के बाद एक गिरने लगे, अगले दिन जब विशाखा कक्षा में दाख़िल हुईं तो उन्होंने अपनी आदत के अनुसार अपना पारंपरिक वाक्यांश “I LOVE YOU ALL” दोहराया। मगर वह जानती थीं कि वह आज भी झूठ बोल रही हैं। क्योंकि इसी क्लास में बैठे एक उलझे बालों वाले बच्चे Shekhar के लिए जो प्यार वह आज अपने दिल में महसूस कर रही थीं…वह कक्षा में बैठे और किसी भी बच्चे से हो ही नहीं सकता था। Lesson के दौरान उन्होंने रोजाना दिनचर्या की तरह एक सवाल Shekhar पर दागा और हमेशा की तरह Shekhar ने सिर झुका लिया। जब कुछ देर तक विशाखा से कोई डांट फटकार और सहपाठी सहयोगियों से हंसी की आवाज उसके कानों में न पड़ी तो उसने अचंभे में सिर उठाकर उनकी ओर देखा। अप्रत्याशित उनके माथे पर आज बल न थे, वह मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने Shekhar को अपने पास बुलाया और उसे सवाल का जवाब बताकर जबरन दोहराने के लिए कहा।
Shekhar तीन चार बार के आग्रह के बाद अंतत:बोल ही पड़ा। इसके जवाब देते ही विशाखा ने न सिर्फ खुद खुशान्दाज़ होकर तालियाँ बजाईं बल्कि सभी से भी बजवायी. फिर तो यह दिनचर्या बन गयी। विशाखा हर सवाल का जवाब अपने आप बताती और फिर उसकी खूब सराहना तारीफ करतीं। प्रत्येक अच्छा उदाहरण shekhar के कारण दिया जाने लगा।
धीरे-धीरे पुराना shekhar सन्नाटे की कब्र फाड़ कर बाहर आ गया। अब विशाखा को सवाल के साथ जवाब बताने की जरूरत नहीं पड़ती। वह रोज बिना त्रुटि उत्तर देकर सभी को प्रभावित करता और नये नए सवाल पूछ कर सबको हैरान भी। उसके बाल अब कुछ हद तक सुधरे हुए होते, कपड़े भी काफी हद तक साफ होते जिन्हें शायद वह खुद धोने लगा था। देखते ही देखते साल समाप्त हो गया और Shekhar ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया यानी दूसरी क्लास। विदाई समारोह में सभी बच्चे विशाखा के लिये सुंदर उपहार लेकर आए और विशाखा की टेबल पर ढेर लग गये। इन खूबसूरती से पैक हुए उपहार में एक पुराने अखबार में बद सलीके से पैक हुआ एक उपहार भी पड़ा था। बच्चे उसे देखकर हंस पड़े। किसी को जानने में देर न लगी कि उपहार के नाम पर ये Shekhar लाया होगा।
विशाखा ने उपहार के इस छोटे से पहाड़ में से लपक कर उसे निकाला। खोलकर देखा तो उसके अंदर एक महिलाओं की इत्र की आधी इस्तेमाल की हुई शीशी और एक हाथ में पहनने वाला एक बड़ा सा कड़ा था जिसके ज्यादातर मोती झड़ चुके थे। विशाखा ने चुपचाप इस इत्र को खुद पर छिड़का और हाथ में कंगन पहन लिया। बच्चे यह दृश्य देखकर हैरान रह गए। खुद shekhar भी। आखिर shekhar से रहा न गया और विशाखा के पास आकर खड़ा हो गया। कुछ देर बाद उसने अटक-अटक कर विशाखा को बताया कि
“आज आप में से मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।”

समय पर लगाकर उड़ने लगा। दिन सप्ताह, सप्ताह महीने और महीने साल में बदलते भला कहां देर लगती है? मगर हर साल के अंत में विशाखा को Shekhar से एक पत्र नियमित रूप से प्राप्त होता जिसमें लिखा होता कि “इस साल कई नए टीचर्स से मिला। मगर आप जैसा कोई नहीं था।” फिर shekhar का स्कूल समाप्त हो गया और पत्रों का सिलसिला भी। कई साल आगे गुज़रे और विशाखा रिटायर हो गईं। एक दिन उन्हें अपनी मेल में shekhar का पत्र मिला जिसमें लिखा था:

“इस महीने के अंत में मेरी शादी है और आपकी अलावा शादी की बात मैं नहीं सोच सकता। एक और बात… मैं जीवन में बहुत सारे लोगों से मिल चुका हूं।। आप जैसा कोई नहीं है………डॉक्टर shekhar

साथ ही विमान का आने जाने का टिकट भी लिफाफे में मौजूद था। विशाखा खुद को हरगिज़ न रोक सकती थीं। उन्होंने अपने पति से अनुमति ली और वह दूसरे शहर के लिए रवाना हो गईं। ऐन शादी के दिन जब वह शादी की जगह पहुंची तो थोड़ी लेट हो चुकी थीं। उन्हें लगा समारोह समाप्त हो चुका होगा… मगर यह देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही कि शहर के बड़े डॉ, बिजनेसमैन और यहां तक कि वहां मौजूद सभी लोग थक गये थे और सोच रहे थे कि आखिर कौन आना बाकी है.
मगर shekhar समारोह में शादी के बजाय गेट की तरफ टकटकी लगाए उनके आने का इंतजार कर था। फिर सबने देखा कि जैसे ही यह पुरानी शिक्षक आयशा ने गेट से प्रवेश किया shekhar उनकी ओर लपका और उनका वह हाथ पकड़ा जिसमें उन्होंने अब तक वह सड़ा हुआ सा कंगन पहना हुआ था और उन्हें सीधा मंच पर ले गया। माइक हाथ में पकड़ कर उसने कुछ यूं बोला “दोस्तो आप सभी हमेशा मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे और मैं आप सबसे वादा किया करता था कि जल्द ही आप सबको उनसे मिलाउंगा।
……..यह मेरी माँ हैं”

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